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परमपूज्य गुरुदेव पुनीतजी आज की तारीख में ज्योतिष जगत के भीष्म पितामह माने जाते है इन्होने इतना साहित्य लिखा है व् ज्योतिष में नित्य नए अनुसन्धान करते ही रहते है इनको कौन धार्मिक व्यक्ति नहीं पहचानता चाहे ज्योतिश हो या तंत्रविद्या हो इनका सानी पुरे विश्व में कोई नहीं है आचार्यजी हमेशा धर्म की रक्षा के लिए तत्पर रहते है ,गऊ, गंगा ,गायत्री की रक्षा करे सेवा करे तो स्वयं धर्म आपकी रक्षा करेगा यह स्वामीजी का मूल मंत्र है .सारे भारतीय यह दिव्य संकल्प करे व् धर्म के इस पवित्र ज्योतिर्मय यज्ञ के लिए समर्पण भाव दिखाय.
भारत माता की जय हो,
जय शिवशंकर
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणी नमोऽस्तुते।।
जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते ।।
शब्दात्मिका सुविमलर्ग्यजुषां निधान मुदगीथरम्य पदपाठवतां च साम्नाम। देवीत्रयीभगवतीभव भावनायवार्ता च सर्वजगतां परमार्तिहन्त्री।। सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते। स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तुते।।
भगवती माँ कल्याणी सभी का कल्याण करें और जन जन को सत्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।।
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| Posted by: gurudev punitji on 8 Mar. 2010 |
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