practice makes a human perfect

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practice makes a human perfect

इंसान खुद को साबुन पानी से मल मल के नहलाता है लेकिन फिर भी जब देह को रगड़कर साफ़ करता है तो तौलियाँ गंदा पाता है । इस ही तरह मनुष्य  à¤®à¤¨ है बार बार अभ्यास करते रहने के बावजूद भी एक क्षण से पहले मलिन हो जाता है । 

ऐसा क्या कर सकते है जो हमें पथ भ्रमित ना होने दे ??? क्षण भर के लिए भी नहि ।। 

हमें खुद के व्यवहार पर बहुत बारीकी से काम करना होगा । चेतना का स्तर जितना बेहतर ग़लतियाँ उतनी काम  à¤¹à¥‹à¤‚गी । क्योंकि हम हर व्यक्ति , वस्तु को अपनी सुविधा के हिसाब से टुकड़ों में बाँट कर देखते है ।कि वैसे तो व्यक्ति बढ़िया है लेकिन आज के उसके बुरे बर्ताव के कारण मैंने ये मान लिया कि वह सदा ही ऐसा है मैंने इतने समय में किए हुए उसके अच्छे कामों को ,स्वभाव को भुलाकर सिर्फ़ आज के समय के अनुसार निर्णय बना लिया । इस प्रकार हम एक दोग़लेपन की  à¤œà¤¼à¤¿à¤‚दगी जीते है जो हमें अपने अभ्यास पर अडिग नहीं रहने देता ।

जब तक हम दिखावे की परत नही उतारते , नियम का महत्व नहि समझते तब तक हर दिन अपना एक नया रूप देखते रहेंगे। जीवन में उन्नति का मार्ग अभ्यास के साथ ही खोला जा सकता है । जिसके लिए मार्ग दर्शन और निरंतर अभ्यास ही कुंजी है। 

#divineworldorder
#sanatandharma
#GuruGrace



Life Positive 0 Comments 2020-10-06 5 Views

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