Surya ki Madhadasha
सूरà¥à¤¯-यदि कà¥à¤£à¥à¤¡à¤²à¥€ में सूरà¥à¤¯ कारक हो, उचà¥à¤š राशि का हो तथा पाप पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से रहित हो तो अपनी दशा-अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ में शà¥à¤ फल देता है । जातक के धन-घानà¥à¤¯ की वृदà¥à¤§à¤¿ होती है, उसे पदोनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ का अवसर निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ है । राजà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ सामान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है, अपने समाज में मान-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा बढती है । जातक के सà¤à¥€ कारà¥à¤¯ अनायास ही हो जाते हैं । अकारक à¤à¤µ पाप पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ सूरà¥à¤¯ की अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ में जातक के शरीर में गरà¥à¤®à¥€ बढ जाती है, कोडा-मà¥à¤°à¥€, चकतà¥à¤¤à¥‡, खाज जैसे रोग उसे पीडित करते हैं। जातक के मन में अशानà¥à¤¤à¤¿ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है तथा उसके चित को परिताप पहà¥à¤‚चता है । आय की अपेकà¥à¤·à¤¾ वà¥à¤¯à¤¯ बढा-चढा रहता है, फलत: आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बिगड़ जाती है। पदावनति, सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤°à¤£, अधिकारियों से विरोध जैसी आपतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जाती है तथा वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ à¤à¤Ÿà¤•ना पड़ता है ।
चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤®à¤¾-यदि कà¥à¤£à¥à¤¡à¤²à¥€ में चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤®à¤¾ उचà¥à¤š राशि का, सà¥à¤µà¤—ृही, मितà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€, शà¥à¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ में होकर सूरà¥à¤¯ का मितà¥à¤° हो तथा सूरà¥à¤¯ से केनà¥à¤¦à¥à¤°, धन अथवा साय सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हो तो शà¥à¤ फल पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है । चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤®à¤¾ की शà¥à¤ दशा में जातक धन-घानà¥à¤¯ में वृदà¥à¤§à¤¿ कर लेता है तथा नौकरी करता हो तो पदोनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ होती है। उसे सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ à¤à¤µ सनà¥à¤¤à¤¤à¤¿ सà¥à¤– मिलता है, विरोधी गà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ से सनà¥à¤§à¤¿ होती है । मितà¥à¤° वरà¥à¤—, विशेषता सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ मितà¥à¤°à¥‹à¤‚ से लाठरहता है । à¤à¤¸à¥‡ समय में जातक में à¤à¤¾à¤µà¤¾à¤µà¥‡à¤— बॠजाता है कà¥à¤¯à¤¾ वह कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ में विवरण करता है तथा कविता, सिनेमा à¤à¤µ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक दृशà¥à¤¯à¥‹à¤‚ आदि का अवलोकन करने में विशेष रà¥à¤šà¤¿ लेता है। यदि चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤®à¤¾ कà¥à¤·à¥€à¤£à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में, पाप पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से, सूरà¥à¤¯ से छठे या आठवें सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हो तो अशà¥à¤ फल ही मिलते है। जातक में कामवासना बढ जाती है, पà¥à¤°à¥‡à¤®-पà¥à¤°à¤¸à¤‚गों से अपयश मिलता है, धन हानि तथा लोगों में वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ की तकरार होती है । कई पà¥à¤°à¤•ार के रोग जैसे जलोदर, आमातिसार, नजला, जà¥à¤•ाम आदि उसे घेर लेते है।
मंगल-यदि कà¥à¤£à¥à¤¡à¤²à¥€ में मंगल उचà¥à¤š राशि का होकर शà¥à¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ में तथा दशानाथ से व शà¥à¤ लगà¥à¤¨ से शà¥à¤à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤—त हो तो जातक इसकी दशा में à¤à¥‚मि à¤à¤µ कृषि-कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ से लाठपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर लेता है । जातक को नवीन गृह की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है। यदि मंगल लाठअथवा à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ à¤à¤¾à¤µ के अधिपति से यà¥à¤•à¥à¤¤ हो तो जातक को विशेष रूप से वाहन, मकान à¤à¤µ धन का लाठहोता है। यदि जातक सेना में हो तो उसे उचà¥à¤š पद पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है अथवा उसकी पदोनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ होती है ।यदि मंगल अशà¥à¤ अवसà¥à¤¥à¤¾ में होकर तà¥à¤°à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हो तो जातक को सेना, पà¥à¤²à¤¿à¤¸ व चोर लà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤‚ से à¤à¤¯ रहता है, मितà¥à¤°à¥‹à¤‚-परिजनों से वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ के à¤à¤—डे होते हैं, धन व à¤à¥‚मि का नाश तथा अरà¥à¤¶, रकà¥à¤¤à¤ªà¤¿à¤¤à¥à¤¤, नेतà¥à¤°à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¾, रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª à¤à¤µ मनà¥à¤¦à¤¾à¤—à¥à¤¨à¤¿ जैसे रोग हो जाते हैं । जातक का चितà¥à¤¤ दà¥à¤°à¥à¤¬à¤² हो जाता है तथा विफलता à¤à¤µ घबराहट बॠजाती है ।
राहà¥-राहॠचूà¤à¤•ि सूरà¥à¤¯ का पà¥à¤°à¤¬à¤² शतà¥à¤°à¥ है, अत: सूरà¥à¤¯ महादशा में राहॠकी अंतरà¥à¤¦à¤¶à¤¾ कोई विशेष फल पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ नहीं कर पाती। यदि राहॠशà¥à¤ गà¥à¤°à¤¹ व राशि में होकर सूरà¥à¤¯ से केनà¥à¤¦à¥à¤°, दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ अथवा à¤à¤•ादश à¤à¤¾à¤µ में हो तो दशा के पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ में कà¥à¤› अशà¥à¤ फ़ल à¤à¤µ अनà¥à¤¤ में कà¥à¤› अचà¥à¤›à¥‡ फल पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है । जातक निरोग बना रहता है । à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ में अचानक वृदà¥à¤§à¤¿, पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤µ, घर में मंगल कारà¥à¤¯, पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ पर जाने से लाठà¤à¤µ पदोनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤°à¤£ जैसे माल देता है। यदि पाप पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ राहॠसूरà¥à¤¯ से तà¥à¤°à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में गया हो तो जातक को राजकीय दणà¥à¤¡ की आशंका बनती है । आपà¥à¤¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ से पीड़ा, कारावास, अकाल मृतà¥à¤¯à¥, सरà¥à¤ªà¤¦à¤‚श का à¤à¤¯, धन, मन, à¤à¥‚मि और दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯ का नाश होता है । इस दशाकाल में जातक सà¥à¤– की à¤à¤• सास तक नहीं ले पाता।
बृहसà¥à¤ªà¤¤à¤¿-सूरà¥à¤¯ की महादशा में उचà¥à¤š, सà¥à¤µà¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€, पितà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€ या शà¥à¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ बृहसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ की अंतरà¥à¤¦à¤¶à¤¾ चले तो जातक को अनेक शà¥à¤ पाल मिलते है । जातक अविवाहित हो तो सरà¥à¤µà¤—à¥à¤£ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ जीवन-साथी मिलता है, उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—ी परीकà¥à¤·à¤¾ में सफलता, धन व मान-समà¥à¤®à¤¾à¤¨ की पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿, राजà¥à¤¯à¤•ूपा, पदोनà¥à¤¨à¤¤à¤¿, देवाराधन में रà¥à¤šà¤¿, बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£, अथिति, साधà¥-सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ की सेवा करने की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ बनती है । शतà¥à¤°à¥ परासà¥à¤¤ होते हैं, परिवार में महोतà¥à¤¸à¤µ कà¥à¤¯à¤¾ आपà¥à¤¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ से लाठरहता है।यदि बृहसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ नीव का, पाप मधà¥à¤¯à¤¤à¥à¤µ मेà¤, पापी गà¥à¤°à¤¹à¥‹à¤‚ से दृषà¥à¤Ÿ अथवा यà¥à¤•à¥à¤¤ होकर सूरà¥à¤¯ के तà¥à¤°à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हो तो अपनी अंतरà¥à¤¦à¤¶à¤¾ में जातक को सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ व सनà¥à¤¤à¤¾à¤¨-पीडा, देह-पीडा तथा मन में à¤à¤¯ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करता है । जातक पाप करà¥à¤®à¥‹ में लगा रह कर अपना सरà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¶ कर
लेता है कà¥à¤¯à¤¾ पितà¥à¤¤à¤œà¥à¤¯à¤°, पीलिया, कामला, असà¥à¤¥à¤¿-पीडा और कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤— से पीडित होता है ।
शनि-राहॠकी à¤à¤¾à¤à¤¤à¥€ शनि à¤à¥€ सूरà¥à¤¯ का शतà¥à¤°à¥ गà¥à¤°à¤¹ है। इस दशाकाल में जातक को बहà¥à¤¤ कà¥à¤› राहॠजैसे ही फल मिलते हैं, लेकिन जातक पापकरà¥à¤®à¤¾ नहीं बनता । शनि अपने अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ काल में जातक को सà¥à¤µà¤²à¥à¤ª यन-धानà¥à¤¯ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ कराता है तथा उसके शतà¥à¤°à¥ नषà¥à¤Ÿ होते हैं । यदि शनि उचà¥à¤š अथवा सà¥à¤µà¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€ होकर केनà¥à¤¦à¥à¤°, दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯, तृतीय या जाय सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में हो तो जातक का कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ होता है, निमà¥à¤¨ वरà¥à¤— के तीनों से उसे लाठरहता है, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में लमà¥à¤¬à¤¿à¤¤ केसों में उसे विजय निलती है, लेकिन यदि अशà¥à¤ शनि सूरà¥à¤¯ से तà¥à¤°à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में गया हो तो जातक की बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ अमित हो जाती है, पिता-पà¥à¤¤à¥à¤° में वैमनसà¥à¤¯ बॠजाता है, शतà¥à¤°à¥à¤“ की पà¥à¤°à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ के कारण चितà¥à¤¤ को परिताप पहà¥à¤‚चला है, अधिकार हानि व पदावनति होकर कवि-वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ चौपट हो जाता है । वृतà¥à¤¤à¤¿ का हास à¤à¤µà¤‚ शारीरिक-शकà¥à¤¤à¤¿ कà¥à¤·à¥€à¤£ हो जाती है, आतà¥à¤®à¤˜à¤¾à¤¤ करने की इचà¥à¤›à¤¾ होती है, जनà¥à¤®à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ को तà¥à¤¯à¤¾à¤—ना पड़ता है, वायà¥à¤°à¥‹à¤— पà¥à¤°à¤¬à¤² हो जाते हैं, जेसे सà¥à¤µà¤¾à¤¸, अफारा, दांत व कान में पीडा, दाद, छाजन आदि रोग पीडित करते हैं
बà¥à¤§-बà¥à¤§ à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ गà¥à¤°à¤¹ है जो सूरà¥à¤¯ के साथ रहकर à¤à¥€ असà¥à¤¤ फल नहीं देता । यदि बà¥à¤§ परमोचà¥à¤š, सà¥à¤µà¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€, मितà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€, शà¥à¤ गà¥à¤°à¤¹à¥‹à¤‚ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ और सूरà¥à¤¯ से नà¥à¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में न हो तो जातक राशà¥à¤¯à¤•ूपा पा जाता है। उसे सà¥à¤µà¥€-पà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤¦à¤¿ का पूरà¥à¤£ सà¥à¤– मिलता है तथा वाहन व वसà¥à¤µà¤¾à¤à¥‚षणों की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है। यदि बà¥à¤§ à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¥‡à¤¶ से ‘यà¥à¤•à¥à¤¤ हो तो जातक की à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¥ƒà¤¦à¥à¤§à¤¿ करता है, यदि लाठसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में हो तो वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ में पà¥à¤°à¤¬à¤² वृदà¥à¤§à¤¿ होकर धनारà¥à¤œà¤¨ होता है । यदि करà¥à¤® सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में करà¥à¤®à¥‡à¤¶ से यà¥à¤•à¥à¤¤ हो तो सतà¥à¤•रà¥à¤ªà¥‹ में रà¥à¤šà¤¿, मान-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा में वृदà¥à¤§à¤¿ व पदोनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ होती है । जातक संपूरà¥à¤£ सà¥à¤– पा लेता है। अशà¥à¤ बà¥à¤§ छठे या जाओं सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हो तो जातक मन से अजà¥à¤žà¤¾à¤¨ रहता है, पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ अधिक करने होते हैं तथा धन-हानि होती है और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कà¥à¤·à¥€à¤£à¤¾ हो जाता है । कारà¥à¤¯-वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ ठपà¥à¤ª हो जाता है, इषà¥à¤Ÿ-मितà¥à¤°à¥‹à¤‚ से सनà¥à¤¤à¤¾à¤ª पहà¥à¤‚चता है । जातक को विशà¥, चरà¥à¤ª रोग, दाद, खà¥à¤œà¤²à¥€, फीड़ा-फà¥à¤¨à¥à¤¸à¥€ जूती-ताप, सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¥à¤¦à¥‹à¤¬à¤‚लà¥à¤¯, जिगर-तिलà¥à¤²à¥€ या अजीरà¥à¤£ आदि जैसे रोग घेर लेते है तथा जातक अपने धन का à¤à¤• बड़। à¤à¤¾à¤— दवा-दारू पर वà¥à¤¯à¤¯ करने को बाधà¥à¤¯ हो जाता है।
केतà¥-यदि सूरà¥à¤¯ महादशा में केतॠकी अंतरà¥à¤¦à¤¶à¤¾ चल रही हो तो थोडे शà¥à¤ फलों को à¤à¥€ जातक à¤à¥‚ल जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¤¾à¤¯ इस दशा में अशà¥à¤ फल ही अधिक मिलते है । देह-पीडा व सà¥à¤µà¤œà¤¨à¥‹à¤‚ से विछोह हो जाता है । शतà¥à¤°à¥ वरà¥à¤— पà¥à¤°à¤¬à¤² हो जाता है, पदावनति होती है, सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤°à¤£ à¤à¤¸à¥€ जगह होता है जहां जातक कषà¥à¤Ÿ ही कषà¥à¤Ÿ à¤à¥‡à¤²à¤¤à¤¾ है । दशा के पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ काल में थोडे शà¥à¤ फल निलते हैं, अलà¥à¤ª धन की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿, देह-सà¥à¤– à¤à¤µ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-सà¥à¤– मिलता है, शà¥à¤ करà¥à¤®à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ रà¥à¤šà¤¿ रहती है, लेकिन सूरà¥à¤¯ से तà¥à¤°à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ केतॠकी दशा में धन व सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की हानि होती है, मनसà¥à¤¤à¤¾à¤ª मिलता है, परिजनों से à¤à¤—डे होते हैं, दà¥à¤·à¥à¤Ÿ संगति में रहने से राजà¥à¤¯à¤¦à¤£à¥à¤¡ मिलता है, दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ में हडà¥à¤¡à¥€ टूटने का à¤à¤¯ बढ जाता है तथा पदावनति होती है।
शà¥à¤•à¥à¤°–यदि शà¥à¤•à¥à¤° उचà¥à¤š राशि, सà¥à¤µà¤°à¤¾à¤¶à¤¿ व नितà¥à¤¯ राशि का हो तथा शà¥à¤ गà¥à¤°à¤¹ से यà¥à¤•à¥à¤¤ अथवा दृषà¥à¤Ÿ हो तथा सूरà¥à¤¯ से दà¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ न हो तो सूरà¥à¤¯ महादशा में शà¥à¤•à¥à¤° की अंतरà¥à¤¦à¤¶à¤¾ अतीव शà¥à¤ फलों के देने वाली होती है । विवाहोतà¥à¤¸à¤µ, पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤µ आदि अनेक मंगल कारà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ होते है । राजà¥à¤¯ सरीखे वैà¤à¤µ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है । पशà¥à¤§à¤¨, रतà¥à¤¨, आमूषण,मिषà¥à¤ ानà¥à¤¨ à¤à¥‹à¤œà¤¨ à¤à¤µ विविध वसà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤²à¤‚कार मिलते है । नौकर-चाकर, वाहन व मकान का पूरà¥à¤£ सà¥à¤– मिलता है तथा मान-सनà¥à¤®à¤¾à¤¨ में वृदà¥à¤§à¤¿ होती है। यदि शà¥à¤•à¥à¤° नीच राशि का व पाप पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ होकर सूरà¥à¤¯ से तà¥à¤°à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ से हो तो मानसिक कलह, पतà¥à¤¨à¥€-सà¥à¤– में कमी, सनà¥à¤¤à¤¤à¤¿-कषà¥à¤Ÿ व विवाह में अवरोध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होते हैं, सà¥à¤µà¤œà¤¨à¥‹à¤‚ से वैमनसà¥à¤¯ बà¥à¤¤à¤¾ हे, शिरोवेदना, जà¥à¤µà¤°à¤¾à¤¤à¤¿à¤¸à¤¾à¤°, शूल, पà¥à¤°à¤®à¥‡à¤¹, सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨à¤¦à¥‹à¤· व शà¥à¤•à¥à¤°à¤¦à¥‹à¤· जैसी वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤¯à¤¾ होती हैं ।
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